Tuesday, 21 March 2017

सबसे बड़ा पाप ( The biggest sin )

"माता-पिता " भगवान का हमें दिया हुआ वो अनमोल तोहफा जिनके प्यार की कोई सीमा नहीं या यूं कहूँ कि खुद भगवान, माता-पिता के रूप में हमारे साथ मौजूद होते हैं। सोचो दोस्तों पूरी ज़िन्दगी बस अपने बच्चो को समर्पित कर देने वाले माता-पिता क्या भगवान नहीं हैं? बिल्कुल हैं, दुनिया के हर माता-पिता उस भगवान का जीता जागता उदाहरण हैं। कभी भी कोई माता-पिता अपने बच्चों का अहित नहीं सोच सकते। जब कोई व्यक्ति कामयाब होता है तो उस कामयाबी में जितना योगदान उसकी मेहनत का होता है उससे कई ज्यादा उसके माता-पिता के आशिर्वाद का फल होता है। 

                                                                 मुझे नहीं पता दोस्तों भगवान कैसे दिखते होंगे पर हाँ इतना जरूर कह सकता हूँ भगवान दुनिया के हर माता-पिता जैसे ही होंगे। जिनमे अपने बच्चों के लिये अटूट प्रेम और विश्वास होता है। पर ये हमारा बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि हम ये सब जानते हुये भी अपने माता-पिता के प्यार,विश्वास और उनकी भावनाओं को तार-तार करके उन्हें व्रद्धाश्रम में छोड़ देते हैं और ये सबसे बड़ा पाप कर देते हैं जिसका शायद कोई प्रायश्चित भी ना हो। आखिर कौन हैं वो लोग जो ये पाप  करते हैं ? क्या किसी दूसरे ग्रह के लोग हैं? नहीं हमारे ही बीच रहने वाले कुछ ऐसे चेहरे जो इस भीड़ में जिसे वो society कहते हैं इज्जतदार,पढ़े लिखे  और सम्पन्न होने का दिखावा करते हैं। अरे कोई व्यक्ति जो अपने माता-पिता के साथ ऐसा कर सकता है वो इज्जतदार,पढा लिखा और सम्पन्न कैसे हो सकता है ? जो व्यक्ति जीवन का सबसे पहला और impotant lesson इंसानियत को ही नहीं समझता वो कैसे पढ़ा लिखा,इज्जतदार या सम्पन्न हो सकता है?

                                                                  हमारी माँ जिसने 9 महीने हमे पेट में रखा,कितनी तकलीफ सही होगी उस माँ ने हमारे लिये। और ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि जब हमारा जन्म हुआ होगा तो हमारी माँ का भी दूसरा जन्म हुआ होगा, क्योंकि किसी बच्चे को 9 महीने तक पेट में रखना और फिर उसे जन्म देना असहनीय तकलीफ और पीड़ा सहकर भी अपने बच्चे की सलामती चाहना एक माँ ही कर सकती है। दूसरी ओर हमारे पिताजी जिनके जीवन का बस एक ही उददेश्य होता है, अपने बच्चो को कामयाब बनाना,उनके हर शौक उनकी हर जरूरतें पूरा करना वो भी अपने शौक,अपनी जरूरतों की परवाह किये बिना। 


दोस्तों हमे पढ़ा लिखाकर कामयाब बनाकर वो दिन भी आता है जब हमारे माता-पिता हमारी शादी करते हैं और समय के साथ उनकी ख़ुशी दोगुनी हो जाती है जब घर में उन्हें दादा-दादी कहने वाले नन्हे मेहमान आ जाते हैं। पर इन सबके बीच कुछ ऐसा भी चलता रहता है या अचानक कुछ ऐसा होता है कि हमारे माता-पिता और हमारी पत्नी के विचार मेल नहीं खाते या ये कहें कि माता-पिता का अनुभव उनकी सीख हमारी पत्नी को और कई बार हमे खुद को भी ताना और बुराई लगने लगती है और इस घर क्लेश के चलते finally माता-पिता को मिलता है व्रद्धाश्रम। उनके प्यार,विश्वास,समर्पण और हमारे लिये देखे गये सपनो का फल मिलता है वो व्रद्धाश्रम। आखिर क्यों?

मैं ये बिल्कुल नहीं कह रहा कि हर घर में ऐसा होता है या हर जगह बस पत्नी ही गलत होती है। हो सकता है कहीं कुछ और हालात हों पर ज्यादातर देखे और सुने गये किस्सों को देखकर और सुनकर  जो लगा वो आप सबके साथ share कर रहा हूँ। ये भी बिल्कुल सही है कि हर पत्नी गलत नही होती पर जो गलत होती हैं वो भी तो हमारे ही बीच का कोई चेहरा होती हैं और पत्नी ही क्यों मैं तो कहूंगा वो बेटा भी गलत होता है जो अपने माता-पिता की ऐसी दुर्दशा कर देता है। जरा सोचिये कल को आप भी माता-पिता बनते हो ,आपके दिल में भी अपने बच्चो के लिये बेसुमार प्यार होगा विश्वास होगा और आँखों में उनके लिये कई सपने होंगे। अगर कल को वो भी आपके साथ ऐसा ही बर्ताव करते हैं तो???

हम सब ऐसे कई case अपने आसपास देखते और सुनते है पर उनपर ध्यान नहीं देते "पता नही किसके घर की क्या कहानी हो " पर दोस्तों कहानी जो भी हो मैं पुरे यकीन से कह सकता हूँ उन माता-पिता का प्यार झूठा नहीं होगा,उनका विश्वास झूठा नही होगा। दुनिया के कोई माता-पिता ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनका बच्चा खुश न रहे या कामयाब न हो। 
फिर क्यों बच्चे उनके इस प्यार और भावनाओं को नहीं समझते ? क्यों छोड़ देते हैं उन्हें पल पल मरने के लिये व्रद्धाश्रम में ?????

please दोस्तों मेरी आप सबसे दिल से request है ये पाप कभी न करें और न ही अपने आसपास ऐसा होने दें। उन बूढी आँखों को अपने बच्चों से कुछ नहीं चाहिये होता सिवाय प्यार और सम्मान के। अपने माता-पिता का सम्मान करें और बहुत प्यार दें। हर मुश्किल आसान होगी अगर सर पर माँ बाप की छांव होगी। 
  





Namstebharat.com पर visit करने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद आपका प्रेम यूँ ही बना रहे इसी विश्वास के साथ...... 

नीचे comments करके अपने विचार जरूर रखें धन्यवाद। 

4 comments:

  1. bahoot accha lekh. aur bahoot accha title sabse bda paap mubarak ho

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    1. आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद कृपया इस पोस्ट को अपने मित्रों के साथ भी शेयर करें ताकि दुनिया में सब लोग अपने माता-पिता का सम्मान करें और उनसे प्यार करें धन्यवाद

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  2. बहुत ही बढ़िया लेख है। ऐसे ही लिखते रहे और मार्गदर्शन करते रहें। :)

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  3. This comment has been removed by the author.

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